Wednesday, June 4, 2008

क्या आप बनना चाहेंगे मुक्ति के जीवनदाता

मुक्तिकान्त प्रधान

उम्र : ३२ साल

निवासी : उड़ीसा


दो साल पहले सितम्बर २००६ को मुक्तिकांत को पता चला कि उसे हाइपर टेंशन है... उसने दवा लेनी शुरू की कुछ समय बाद उसे पता चला कि उसकी दोनों किडनी फ़ेल हो चुकी हैं... अब उसके पास अपनी ज़िंदगी बचाने का एक ही रास्ता था... किडनी ट्रांसप्लांट... इतना महंगा इलाज कैसे होगा मुक्ति और उसके परिवार के लिए ये सबसे बड़ी परेशानी थी... लगभग 5-6 महीने तक मुक्ति का डायलिसिस चलता रहा... किसी तरह पैसे जुटाकर परिवार वालों ने आखिरकार किडनी ट्रांसप्लांट कि तैयारी कर ली... भाई ने अपनी किडनी मुक्ति को दी... ऑपरेशन भी हुआ डॉक्टरों के मुताबिक ये ऑपरेशन सफल था लेकिन मुक्ति को उसके दर्द से मुक्ति नहीं मिल पाई ऑपरेशन के दो दिन बाद ही असहनीय दर्द के चलते मुक्ति को फिर अस्पताल मैं भर्ती होना पड़ा... डॉक्टरों ने उसका दूसरा ऑपरेशन कर डाला... उसके परिवार वालों को बताया गया कि उसका पहला ऑपरेशन ठीक नही हो पाया था... मुक्ति के परिवार के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था... मुक्ति की ट्रांसप्लांट की गई किडनी भी जवाब दे चुकी थी... तबसे अभी तक मुक्ति डायलिसिस पर ही जिंदा है ... उसे हफ्ते में दो दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है....

अपने घर के चिराग को जलाये रखने के लिए मुक्ति के घरवाले अब तक १० लाख से भी ज़्यादा खर्च कर चुके हैं ... लेकिन अब बात इस निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के बूते के बाहर चली गई है...

अपने घर के चिराग को जलाये रखने के लिए मुक्ति के घरवाले अब तक १० लाख से भी ज़्यादा खर्च कर चुके हैं ... लेकिन अब बात इस
निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के बूते के बाहर चली गई है... मुक्ति को जीने चाह है लेकिन उसके लिए करना होगा एक और किडनी ट्रांसप्लांट... इस बार खतरा और भी ज़्यादा है... इसलिए खर्च भी ज़्यादा आएगा... लेकिन कहाँ से ? .... ये सबसे बड़ा सवाल ... क्या आप बनना चाहेंगे मुक्ति के जीवनदाता....???

दीप-प्रकाश: जैसा कि हमने पहले भी बताया है... इस साधना में हम एक माध्यम मात्र हैं... अगर आप मुक्ति कांत को जीवन देने में मदद करना चाहते हैं तो सीधा उससे या उसके परिवार वालों से संपर्क कर सकते हैं... आपकी थोड़ी सी मदद भी न केवल उसे ज़िंदगी दे सकती है बल्कि हमारे मानवता के जज़्बे को और मजबूत करेगी...
हमारे लिए आप बस इतना करें कि अपने कमेंट जरूर लिखें ताकि हमारा हौसला बरकरार रहे...आप हमें किसी और ज़रूरतमंद का प्रोफाइल भी भेज सकते हैं....
हमारा ई-मेल का पता है mrgauravdost@gmail.com

मुक्ति से संपर्क का पता
ADDRESS:

MUKTIKANT PRADHAN
A-66, PARYAVARAN COMPLEX, NEB SARAY,
IGNOU ROAD,
OPP. VIDYASAGAR HOSPITAL
SAKET, NEW DELHI, INDIA
PHONE NOS....9810699515 / 9818156531
आप मुक्तिकांत से मिल सकते हैं... अगर आप दूर हैं तो मुक्तिकांत के नाम चैक भेजकर उसकी मदद कर सकते हैं चैक इस नाम पर भेजें...
MUKTIKANT PRADHAN-002901518040
(Always send a crossed or account payee cheque.)
(अगर आप मदद के लिए आगे आ रहे हैं तो comment के ज़रिए हमें ज़रूर सूचित करें)

4 comments:

Gaurav said...

Manzil pane ke liye kadam to uthana hi padta hai dost...dhool bhi udegi...ghoobar bhi uthega...par jinhe lakshya ka pata hota hai unhe in sabse josh hi milta hai...keep it up...I proud of you.

faheem tanha

Faheem tanha said...

Manzil pane ke liye kadam to uthana hi padta hai dost...dhool bhi udegi...ghoobar bhi uthega...par jinhe lakshya ka pata hota hai unhe in sabse josh hi milta hai...keep it up...I proud of you.

Faheem tanha

Deepti said...

jo kadam aapne uthaya hai gaurav uske baare mein jankar hum khud ko goraaanvit mehsoos kar rahe hain.
D.P.T..............

NEETU said...

Suna tha ki kuchh log bheed ka hissa nahi bante...wo kuch alag dekhte hain...kuch alag karte hain...tumhare baare mein suna kafi tha magar mehsoos aaj kiya...bheed se alag soch hi samaaj ko badalne ka kaam karti hai.......///

Nitu...